सुधार पर ध्यान दे,साबित करने पर नहीं
कितना जीना है यह हमारे हाथ में नहीं है
पर कैसे जीना है यह तो हमारे हाथ में है
कदर वो हो जो मौजूदगी में हो
बाद में होने वाले को पछतावा कहते है
माफ़ करने की आदत डाले
दिमाग में किसी की प्रति नफरत पैदा न हो सके
कभी हार मत मानो
बड़े कामों में समय लगता है
मन में मेल रखकर बाहर से अच्छा बनना
कीचड़ के ऊपर रंग लगाने जैसा है
जो व्यक्ति भीतर से शांत है
बाहरी तूफान हिला नहीं सकता
अधूरा ज्ञान और छोटी सोच
समस्या पैदा करती है समाधान नहीं
अंत तक चलने वाली सांसे भी तुम्हारी नहीं
बहार के दुखो को तुम अपना क्यों मान बैठे हो
जीवन बहुत छोटा है गुस्सा,पछतावा,शिकायत और चिंता करने में व्यर्थ ना करे
हमेशा सकारात्मक रहे और खुश रहे
इस संसार में कोई अपना नहीं है,यह इतना बड़ा सत्य है
स्वीकार करने में मनुष्य को पूरा जीवन लग जाता है