रावण के 10 शिर
गुणों और अवगुणों के भार
काम,क्रोध,चित,अहंकार,मन,मोह,ईर्षा,बुद्धि,लोभ,अहं
1. काम (Desire / Lust)
अर्थ:
इच्छाएँ, विशेष रूप से भौतिक सुखों या कामुकता की तीव्र लालसा।
प्रभाव:
अति होने पर मनुष्य को भोग-विलास में फँसाकर आध्यात्मिक विकास में बाधक बनता है।
क्रोध (Anger)
अर्थ
: किसी अपेक्षा के टूटने या अन्याय के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप उत्पन्न हिंसक भाव।
प्रभाव:
विवेक नष्ट करता है, संबंध बिगाड़ता है और स्वास्थ्य को हानि पहुँचाता है।
चित (Mind /
Consciousness)
अर्थ:
मन की वह अवस्था जो विचारों, संकल्प-विकल्पों से भरी होती है।
प्रभाव:
चित्त की शांति ही ध्यान और आत्मज्ञान का आधार है।
अहंकार (Ego)
अर्थ
: "मैं" का भाव, स्वयं को श्रेष्ठ या अलग समझने की भावना।
प्रभाव:
अहंकार व्यक्ति को विनम्रता से दूर कर देता है और आत्म-विकास में बाधक है।
मन (Mind)
अर्थ:
विचारों, भावनाओं और इच्छाओं का केंद्र।
प्रभाव:
मन के वश में होने पर जीवन सुखद होता है, अन्यथा यह चंचल होकर दुःख देता है।
मोह (Attachment / Infatuation)
अर्थ:
किसी व्यक्ति, वस्तु या भावना के प्रति अत्यधिक आसक्ति।
प्रभाव:
मोह वास्तविकता को देखने नहीं देता
ईर्षा (Jealousy)
अर्थ:
दूसरों की सफलता या सुख देखकर जलन महसूस करना।
प्रभाव:
ईर्ष्यालु व्यक्ति स्वयं के विकास को रोक देता है
बुद्धि (Intellect / Wisdom)
अर्थ:
सही-गलत का निर्णय लेने की शक्ति।
प्रभाव:
बुद्धि ही मनुष्य को पशु से अलग करती है।
लोभ (Greed)
अर्थ:
अधिक पाने की लालसा, जो कभी न संतुष्ट हो।
प्रभाव:
लोभी व्यक्ति नैतिकता त्याग देता है
(जैसे कर्ण का दानवीर होते हुए भी लोभ)
अहं (False Self-Identity)
अर्थ:
शरीर या भूमिकाओं को ही अपना वास्तविक स्वरूप समझना।
प्रभाव:
अहं का त्याग ही मुक्ति है।